Ashok Andrey  (अशोक आंद्रे)
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on Lyrikline: 3 poems translated

from: russo to: híndi

Original

Translation

УРОК РИСОВАНИЯ

russo | Wjatscheslaw Kuprijanow

Ребенок не может нарисовать
море
ребенок не может нарисовать  
землю
у него не сходятся меридианы
у него пересекаются параллели
он выпускает
на волю неба
земной шар
из координатной сети
у него не укладываются
расстояния
у него не выходят
границы
он верит
горы должны быть
не выше надежды
море должно быть
не глубже печали
счастье
должно быть не дальше земли
земля
должна быть
не больше
детского сердца

© СП, Москва
from: Жизнь идет
СП, Москва, 1982
Audio production: Вячеслав Куприянов, 2013

उपदेश प्राप्त करना-२

híndi

आकर्षित नहीं कर सकता एक बच्चा
सभी समुद्रों को
वह आकर्षित नहीं कर सकता
साड़ी जमीन को
केंद्र बिंदु पर उसकी देशांतर रेखाएं
एकजुट नहीं होती हैं कभी
इसीलिए वह गोल धरती को
अपने स्वयं के जाल से जाने देता है
उसकी समानताएं मिलती हैं
यह गोल धरती देती है
समन्वय का
आकाश में बहाव का
 
उसकी दूरी
क़दमों से बाहर है
परे है सीमाओं से
उसका विशवास है कि
पहाड़ होना चाहिये
उम्मीद से ज्यादा बड़े नहीं
समुद्र होना चाहिये
दुःख से ज्यादा गहरा नहीं
ख़ुशी होनी चाहिये
पृथ्वी से आगे नहीं
पृथ्वी होनी चाहिये
एक बच्चे के दिल से बड़ी नहीं !

अनुवाद- अशोक आंद्रे
Translated by Andrey Ashok,
from the book "Hastakshar sharad ritu ke", New Delhi, 2018

УРОК ПЕНИЯ

russo | Wjatscheslaw Kuprijanow

Человек
изобрел клетку
прежде
чем крылья

В клетках
поют крылатые
о свободе
полета

Перед клетками
поют бескрылые
о справедливости
клеток

© Вячеслав Куприянов
Audio production: Вячеслав Куприянов, 2013

गीत गाते उपदेश

híndi

परों के फैलने से पूर्व
आदमी ने
कर दिया आविष्कार पिंजड़ों का.

उन पिंजड़ों में
पंखों ने
नई उड़ान/ स्वंत्रतता के लिए
गुनगुनाये असंख्य गीत आजादी के.

पंख रहित गीतों को
न्याय व्यवस्था की सार्थकता पर
कर दिया स्थापित
पिंजड़ों के निर्माण से पूर्व
आदमी ने.

अनुवाद- अशोक आंद्रे
Translated by Andrey Ashok,
from the book "Hastakshar sharad ritu ke", New Delhi, 2018

БЛИЗОСТЬ

russo | Wjatscheslaw Kuprijanow

Как найти расстояние между нами
измерить шагами
фигурами идущими между нами
колышущимися душами

Сколько идет письмо
от меня к тебе
пока мы стоим
дышим рядом

Сколько бы ни длилась близость
вечность –
это разлука
мера всех любовей

Я жду твоего слова
и не знаю с какого краю
встать ли мне ближе к сердцу
или дать сердцу больше простору
тебя заслонить от ветра
или отдать ветру
и его порыв
перепутать с твоим порывом

И как быть перед лицом солнца –
как удержать наши тени
которые ночь сольет
воедино
с кем бы нас
ни застала

© Вячеслав Куприянов
Audio production: Вячеслав Куприянов, 2013

निकटता

híndi

कैसे खोज रहे हैं
अपने बीच की दूरी
लंबे क़दमों से मापते हुये
रेखांकित कर दी गईं
स्थापित आकृतियों में
फडफडाती आत्माओं को.
 
एक पत्र कितनी लंबी यात्रा करता है
मेरे से आप तक
जबकि हम अभी भी खड़े हैं
लंबी साँस लेते हुये अगल-बगल में.
 
जबकि लंबे समय की निकटता
भड़क सकती है
अंतस में फैली
जुदाई का अहसास लिये
नाप लेता है भावों को.
 
मैं आपके शब्दों की प्रतीक्षा कर रहा हूँ
नहीं जानता कि वे किस भू से हैं
क्या अपने हृदय के करीब आने दूं उन्हें ?
या फिर मंत्रमुग्ध होकर हृदय में अधिक जगह दूं
हवा के विपरीत आश्रय दूं
या फिर हवा की दिशा की ओर रूखसत करूँ
और आनंद के उत्सव में सराबोर होने दूं
साथ तुम्हारे ?
 
किस तरह अपनी छाया को थाम
सूर्य के नीचे रह सकते हैं?
जो रात को आपस में मिलेंगी होकर एक
साथ किसी के
जो आयेंगे हमारे साथ.

अनुवाद- अशोक आंद्रे
Translated by Andrey Ashok,
from the book "Hastakshar sharad ritu ke", New Delhi, 2018