Tushar Dhawal

الهندية

Sarabjeet Garcha

الانجليزية

वह मसीहा बन गया है

​हत्या के दाग
अब उस तरह काबिज़ नहीं हैं उसके चेहरे पर
उनके सायों को अपनी दमक में
वह धुँधला चुका है
उसकी चमक में
पगी हुई हैं भक्तित उन्वानों की
आकुल कतारें
उसकी दमक में चले आ रहे सम्मोहित लोगों की
भीड़ से उठते
वशीभूत नारे
आकण्ठ उन्मत्त
स्तुतियों की दीर्घ जीवी सन्तानों का मलय गान
उसकी धरती पर बरस रहा है
काली बरसात के मेढ़कों के मदनोत्सव पर


 
वह रचयिता है नये धर्मों का धर्म ग्रन्थों का
उसकी कमीज़ में फिट होते फ़लसफ़ों
 का
सृष्टि का नियामक वह सत्ता का

 
एक परोसा हुआ संकट
खुद को हल करता हुआ
नये चुस्त फॅार्मुलों से
ब्रैण्ड के पुष्पक विमान से
दुनिया लाँघता फूल बरसाता यहाँ आ चुका है...
 

अब वह मुझमें है
तुममें है
हमसे अलग कहीं नहीं
वह विजेता है नई सदी का
गरीबों का नाम जपता
उनकी लाशों पर पनपता
मसीहा है वह
मरणशील नक्षत्रों का
जहाँ हम जीवित हैं
जीते नहीं।

© Tushar Dhawal (तुषार धवल)
الإنتاج المسموع: Verseville

Now a Prophet

Murder stains
no longer cling to his face.
He has blurred their shadows
with his radiance.
Enchanted, a throng advances
shouting slogans.
Hosannas, his prolonged progeny,
fall upon frogs having an orgy
in black rain.

He is the founder
of new religions, new scriptures,
of philosophies fitting inside his shirt,
and the regulator of the cosmos,
                                of power.

Finding solutions in new-fangled formulas
and showering flowers while flying across
the world in the Pushpak Viman named Brand,
a new nuisance, served on the platter, is here.

Now he is within you,
within me. We are one with him.
He is the new-century Alexander chanting
the name of the poor, flourishing
on their corpses.
He is the prophet
of moribund stars,
on which we live

but aren’t alive.

Translated by Sarabjeet Garcha